सीबीआई के हाथों में गया सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड का मामला, साल 1963 में हुआ था सीबीआई का गठन

  • हत्या, घोटालों और भ्रष्टाचार जैसे मामलों की जांच करती है सीबीआई, अब करेंगी सुशांत सिंह राजपूत मामले में छानबीन।
  • सीबीआई सिर्फ केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन पर कर सकती है जांच, हत्या, किडनैपिंग, आतंकवाद जैसे मामलों को करती है सोल्व।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला लंबा चला ही जा रहा है। मगर सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में सुनवाई करते हुए ये मामला सीबीआई के हाथों में सौंप दिया है।

बता दें, सीबीआई का गठन सन् 1963 में हुआ था। सीबीआई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले अपराधों जैसे हत्या, घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों और राष्ट्रीय हितों से संबंधित अपराधों की भारत सरकार की तरफ से जांच करती है।

कई हिस्सों में बांटी गई सीबीआई

साल 1963 में सीबीआई का गठन हुआ, तभी सीबीआई को कई हिस्सों में बांटा गया था। जैसे एंटी करप्शन डिवीजन, इकोनॉमिक्स ऑफेंस डिवीजन, स्पेशल क्राइम डिवीजन, डायरेक्टरेट ऑफ प्रॉसिक्यूशन, एडमिनिस्ट्रेटिव डिवीजन, पॉलिसी एंड कॉर्डिनेट डिवीजन औरसेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी।

सीबीआई में कैसे होता है काम

  • एंटी करप्शन डिवीजन- केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, केंद्रीय पब्लिक उपक्रमों और केंद्रीय वित्तीय संस्थानों से जुड़े भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से संबंधित मामलों की जांच एंटी करप्शन डिवीजन में होती है।
  • इकोनॉमिक ऑफेंस डिवीजन– बैंक धोखाधड़ी, वित्तीय धोखाधड़ी, आयात-निर्या और विदेशी मुद्रा अतिक्रमण, नारकोटिक्स, पुरातन वस्तुएं, सांस्कृतिक संपत्ति की बढ़ती तस्करी और विनिषिद्ध वस्तुओं आदि की तस्करी से संबंधित मामलों की जांच इकोनॉमिक ऑफेंस डिवीजन में होती है।
  • स्पेशल क्राइम डिवीजन- आतंकवाद, बम ब्लास्ट,  संवेदनात्मक मानव वध, मुक्ति-धन के लिए अपहरण और माफिया और अंडर-वर्ल्ड द्वारा किए गए अपराधों से संबंधित मामलों की जांच o   स्पेशल क्राइम डिवीजन में होती है।

1965 से हत्या, किडनैपिंग आदि मामले भी आए सीबीआई के पास

सीबीआई की जांच से जुड़ी हर सुनवाई विशेष सीबीआई अदालत में ही होती है। पहले CBI केवल घूसखोरी और भ्रष्टाचार की जांच तक सीमित थी, लेकिन 1965 से हत्या, किडनैपिंग, आतंकवाद, वित्तीय अपराध, आदि की जांच भी सीबीआई के दायरे में आ गई है।

ऐसे करती है सीबीआई मामलों की जांच

सीबीआई केवल उन अपराधों की जांच करता है जो केंद्र सरकार सरकार द्वारा अधिसूचित है। सीबीआई को अनुमति तभी दी जाती है, जब कुछ खास स्थितियां पैदा हो जाए और लंबे समय से स्थानीय पुलिस से कोई केस सुलझे ना।

सीबीआई की शक्तियां ?

डीएसपीई अधिनियम 1946 की धारा 2 के तहत केवल केंद्रशासित प्रदेशों में अपराधों की जांच के लिए CBI ई को शक्ति मिली है। ये शक्तियां दिल्ली और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होती हैं। एक्ट के तहत सीबीआई सिर्फ केंद्रशासित प्रदेशों में खुद से जांच शुरू कर सकती है।

केंद्रशासित प्रदेशों के अलावा केंद्र सरकार सीबीआई की शक्तियों के दायरे को बढ़ा सकती है, मगर उसके लिए राज्य सरकार की सहमति होनी चाहिए। वहीं, सीबीआई केवल केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन पर जांच कर सकती है।

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