Final Year Exam पर सुप्रीम कोर्ट: एससी ने पूरी की सुनवाई, फैसला रखा सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट में ग्रेजुएशन की अंतिम साल की परीक्षा के मामले में आज दिन भर सुनवाई चली है। सुनवाई के दौरान UGC ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाया।

सुप्रीम कोर्ट में वकील ने कहा कि राज्य सरकार यह नहीं कह सकती कि परीक्षा आयोजित न करें। अधिक से अधिक राज्य सरकार ये कह सकती है कि परीक्षा की तारीख आगे बढ़ा दी जाए।

कोर्ट में यूजीसी के वकील ने महाराष्ट्र सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया। यूजीसी ने दलील दी कि विश्वविद्यालय के कुलपतियों को मई में महाराष्ट्र सरकार द्वारा बैठक के लिए बुलाया गया था। इस बैठक में फैसला लिया गया कि पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को पास किया जा सकता है, लेकिन अंतिम परीक्षा की जरूरी है।

इस बैठक के बाद एक याचिका युवा सेना द्वारा दायर की जाती है जिसकी अध्यक्षता आदित्य ठाकरे ने की। इसी युवा सेना की याचिका के बाद सरकार का भी विचार बदल जाता है और वह परीक्षा के खिलाफ हो गई जबकि राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करने का अधिकार ही नहीं है।

यूजीसी के वकील की तरफ से दलील दी गई कि महाराष्ट्र राज्य लोक सेवा परीक्षा सितंबर में आयोजित की जा रही है, जिसमें 2 लाख 20 हजार से अधिक छात्रों के शामिल होने का अनुमान है, जबकि महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों में कुल 10 लाख छात्र हैं। केवल लगभग 2.5 लाख अंतिम वर्ष के छात्र हैं। अगर राज्य लोक सेवा परीक्षा आयोजित की जा सकती है तो अंतिम वर्ष विश्वविद्यालय परीक्षा क्यों नहीं ?

सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि छात्रों का हित किसमें है ये छात्र तय नहीं कर सकते। इसके लिए वैधानिक संस्था है. छात्र ये सब तय करने के काबिल नहीं हैं। सरकारें बस दो ही काम कर सकती हैं अव्वल तो परीक्षा कराने में खुद को अक्षम बताते हुए हाथ खड़े कर दें या फिर पिछली परीक्षा के नतीजे के आधार पर रिजल्ट घोषित कर दें।

महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट में कह दिया है कि आज की तारीख में परीक्षाएं कराना मुमकिन नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि क्या सरकार ये कह सकती है कि बिना परीक्षा के सबको पास किया जाएगा। अगर हम ये मान लें तो किसी को कोई दिक्कत नहीं होगी।

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